October 18, 2021

DNA Analysis: कश्मीर को Article 370 से मिली आजादी की कहानी, जानें 2 साल बाद अब कैसे हैं हालात


नई दिल्ली: 5 अगस्त का दिन जम्मू कश्मीर के लिए ऐतिहासिक है, क्योंकि इसी दिन दो साल पहले साल 2019 में जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 और धारा 35-A हटा दी गई थी. इसके तहत तब जम्मू कश्मीर को वर्ष 1950 में भारतीय संविधान के तहत दिया गया विशेष राज्य का दर्जा समाप्त कर दिया गया था और जम्मू कश्मीर एक देश, एक विधान और एक संविधान के दायरे में आया था. यानी 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर और भारत ने एक नए युग में प्रवेश किया था. 5 अगस्त 2019 को जब राज्य सभा में गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने इस ऐतिहासिक फैसले की जानकारी देश को दी थी, तो लोगों को अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ था.

झूठी साबित हुई इमरान खान की बातें

उस समय पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) ने इस पर संयुक्त राष्ट्र (United Nations) में भारत के खिलाफ काफी दुष्प्रचार फैलाया था और अपने भाषण में उन्होंने कहा था कि विशेष राज्य का दर्जा छिन जाने के बाद जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) में नरसंहार शुरू हो जाएगा और लोगों के मानव अधिकारों का उल्लंघन होगा, लेकिन इमरान खान ने उस समय जो भी कहा, वो सब झूठ साबित हुआ.

कश्मीर को लेकर प्रदर्शन हुआ फ्लॉप

इमरान खान (Imran Khan) चाहें तो आज के कश्मीर की तस्वीरें देख सकते हैं. हुर्रियत कॉन्फ्रेंस ने गुरुवार (5 अगस्त 2021) को अनुच्छेद 370 की बहाली के लिए कश्मीर बंद बुलाया था, लेकिन ये बंद पूरी तरह सुपर फ्लॉप रहा. जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) में अलग-अलग जगहों पर जश्न मनाया गया और तिरंगा भी लहराया गया. जम्मू कश्मीर को लेकर इसी तरह का सुपर फ्लॉप शो लंदन में इंडियन हाई कमिशन के बाहर भी हुआ. ये प्रदर्शन पाकिस्तान की तरफ से बुलाया गया था और इसके लिए बकायदा अखबार में इस्तिहार भी छपवाए गए थे, लेकिन इसके बाद इस प्रदर्शन में मुट्ठीभर लोग शामिल हुए और ये प्रदर्शन एक सुपर फ्लॉप शो साबित हुआ.

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इस तरह भारत का हिस्सा बना था जम्मू-कश्मीर

15 अगस्त 1947 को जब भारत आजाद हुआ था, उस समय देश में 565 रियासतें थीं, जिनका भारत के 40 प्रतिशत इलाकों पर शासन था. विभाजन के दौरान जब पाकिस्तान बना तो इन रियासतों को तीन विकल्प दिए गए. पहला विकल्प ये था कि वो स्वतंत्र रहें, दूसरा विकल्प था वो भारत में अपना विलय कर लें और तीसरा विकल्प था वो पाकिस्तान के साथ चले जाएं. इनमें तीन रियासत जूनागढ़, हैदराबाद और जम्मू-कश्मीर ने खुद को स्वतंत्र रखने का फैसला किया, लेकिन विभाजन के कुछ ही दिन बाद पाकिस्तान के कबायलियों ने धोखे से जम्मू कश्मीर पर कब्जा करने के लिए हमला कर दिया और इस बात से घबरा कर जम्मू कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने भारत की सरकार से मदद मांगी. तब इसके लिए Instrument of Accession समझौते पर हस्ताक्षर हुए.

समझौते के तहत कश्मीर को मिला विशेष अधिकार

इस समझौते के तहत जम्मू कश्मीर की रक्षा, विदेश और संचार व्यवस्था पर कानूनी अधिकार भारत को मिल गया और बाकी मामलों में जम्मू कश्मीर को विशेष अधिकार दिए गए. जैसे- तब ये शर्त रखी गई कि जम्मू कश्मीर पर भारत का संविधान तब तक लागू नहीं होगा, जब तक जम्मू कश्मीर में इसकी सहमति ना हो. हालांकि उस समय पंडित जवाहर लाल नेहरू ने इन शर्तों को नहीं माना होता तो शायद ये विशेष छूट जम्मू कश्मीर को मिलती ही नहीं, क्योंकि उस समय महाराजा हरि सिंह को भारतीय सेना की मदद की बहुत जरूरी थी.

बीआर अम्बेडकर थे अनुच्छेद 370 के खिलाफ

26 जनवरी 1950 को जब भारत का संविधान लागू हुआ तो इसमें अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू कश्मीर को विशेष शक्तियां संवैधानिक रूप से भी दे दी गईं. हालांकि संविधान निर्माता डॉक्टर भीम राव अम्बेडकर और संविधान सभा के एक और सदस्य मौलाना हसरत मोहानी इसके खिलाफ थे. ऐसा भी कहा जाता है कि जब अम्बेडकर ने ये अनुच्छेद लिखने से मना कर दिया तो जवाहर लाल नेहरु ने ये काम अपने करीबी एन. गोपालस्वामी अय्यंगर को सौंपा, जो भारत की पहली मंत्रिपरिषद में कैबिनेट मंत्री थे. इसीलिए अनुच्छेद 370 को आजादी के बाद भारत की सबसे बड़ी भूल कहा जाता था, जिसे वर्ष 2019 में मोदी सरकार ने सुधारा.

370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में क्या-क्या बदल गया

पहले जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) के पास विशेष राज्य का दर्जा था, जो अब समाप्त हो चुका है. पहले वहां लोगों के पास दोहरी नागरिकता थी. वो जम्मू कश्मीर के भी नागरिक थे और भारत के भी नागरिक थे, लेकिन अब देश के बाकी लोगों की तरह वहां भी एक ही नागरिकता है. इसके अलावा पहले ये कानून था कि जम्मू कश्मीर की कोई लड़की भारत के किसी राज्य के लड़के से शादी करती है तो उसका उसके परिवार की संपत्ति में अधिकार खत्म हो जाता था और उसके बच्चों की भी जम्मू कश्मीर की नागरिकता खत्म हो जाती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है.

पहले जम्मू कश्मीर का अलग झंडा था, लेकिन अब तिरंगा ही पूरे जम्मू कश्मीर में लहरा रहा है. पहले जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 356 लागू नहीं था. यानी वहां सरकार भंग होने पर राष्ट्रपति शासन नहीं लग सकता था, लेकिन अब अनुच्छेद 356 जम्मू कश्मीर में लागू है. जम्मू कश्मीर अनुच्छेद 360 के दायरे में भी नहीं आता था, जिसके तहत राष्ट्रपति आर्थिक आपातकाल लागू करते हैं, लेकिन इस फैसले के बाद ये व्यवस्था भी वहां आ गई है. अलग विधान यानी कानून होने की वजह से अल्पसंख्यकों को आरक्षण नहीं मिलता था, लेकिन अब वहां अल्पसंख्यकों को आरक्षण की व्यवस्था है.

पहले दूसरे राज्य के लोग जम्मू कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकते थे, लेकिन अब ये कानून नहीं है. Right to Information Act यानी सूचना का अधिकार नहीं था, लेकिन अब दूसरे राज्यों की तरह वहां भी लोगों के पास ये कानून है. पहले जम्मू कश्मीर में सरकार का कार्यकाल 6 साल का होता था, लेकिन अब वहां भी 5 साल के बाद चुनाव कराने का प्रावधान है. सबसे अहम पहले लद्दाख जम्मू-कश्मीर का हिस्सा था, लेकिन अब लद्दाख को भी अलग से केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया है.

धारा 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर को क्या मिला?

पूछने वाले पूछते हैं कि अनुच्छेद 370 के हटने से कश्मीर की सेहत पर क्या फर्क पड़ा और यहां के लोगों को क्या मिला? तो आपको बता दें कि अनुच्छेद 370 के हटने से पिछले 2 साल में एलओसी (LoC) के पास बसे गांवों में बिजली का उपहार और सड़कों की सौगात मिली है. एलओसी के पास चौटाली गांव है और यह इस सेक्टर का आखिरी गांव है. बिजली और कम्यूनिटी बंकर ये दो चीजें हैं, जो इन्हें खासतौर पर मिली हैं. इसके बाद यहां के लोगों को लगता है कि जम्मू-कश्मीर से भारत से और भारत सरकार से अब हम जुड़ चुके हैं.

370 हटने के 1 साल बाद ही पहुंची बिजली

साल 1947 में भारत की आजादी के बाद से पहली बार बारामूला के बोनियार तहसील के चौटाली गांव में बिजली के तार पहुंचे. अनुच्छेद 370 हटाए जाने के एक साल बाद ही चौटाली गांव में बिजली आ गई. इसके बाद तो जैसे लोगों की जिंदगी बदल गई. पहले की सरकारें कहती रहीं कि सीमा पर बसे गांवों में विकास कार्य नहीं हो पाते,क्योंकि आतंकी घटनाएं होती हैं और बमबारी होती हैं. लेकिन सच ये है कि झूठी बयानबाजी से बदलाव नहीं आता. आज यहां बिजली है और आज भी ये गांव सीमा पर ही हैं. कुछ इसी तरह की कहानियां सुनाकर पहले की सरकारें बारामुला के दाराकुंजन गांव में सड़क नहीं बना रही थीं. ये गांव भी सीमा पर बसा है, लेकिन अनुच्छेद 370 हटा तो विकास के रास्ते खुले और ये रास्ते अब पक्के बनाए जा रहे हैं.

अब नया कश्मीर बढ़ रहा है आगे

अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश बना और विकास की जिम्मेदारी केंद्र की ओर से नियुक्त उपराज्यपाल ने संभाली. तब से कश्मीर में विकास का रास्ता अंतिम गांव तक पहुंचने लगा. कश्मीर की पहचान सिर्फ डल झील नहीं है. ये वो कश्मीर है, जो अंजाना है. यहां बड़े मुश्किल रास्तों से पहुंचना पड़ता है. सड़क अभी पूरी नहीं बनी है और काम जारी है, लेकिन गांव के लोग बहुत खुश हैं. असली कश्मीर के लोग सड़क जैसी बुनियादी सुविधा पाकर एहसानमंद हो रहे हैं. वो नहीं जानते कि सड़क बनाना, बिजली-पानी पहुंचाना सरकारों की ही जिम्मेदारी है. इसीलिए तो वो होती हैं, लेकिन अभी तक उन्हें बरगलाया गया, डराया गया. जिसकी वजह से वो समझ नहीं पाए कि असली और झूठी सरकारों का फर्क क्या है. अब स्थिति बदली है, नया कश्मीर देश के बाकी हिस्सों की तरह ही इन रास्तों से आगे बढ़ रहा है.

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